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असंतुलित मात्रा में उर्वरकों के प्रयोग से खेतों की मृदा का स्वास्थ्य हो रहा है खराब: डॉ. नित्यानंद

कृषि विज्ञान केंद्र, सिरिस (औरंगाबाद) ने आज किसानों को जागरूक करने के लिए उर्वरकों के संतुलित उपयोग विषय पर ऑनलाइन वेबिनार का आयोजन किया! इस ऑनलाइन मीटिंग में 40 से अधिक किसानों ने भाग लिया। पढ़िए पूरी खबर

सत्यम मिश्रा

सत्यम मिश्रा

सिरिस, औरंगाबाद, Jun 18, 2021 (अपडेटेड Jun 18, 2021 8:54 PM बजे)

कृषि विज्ञान केंद्र, सिरिस (औरंगाबाद) के द्वारा आज (18 जून 2021 12:15 PM बजे) किसानों को जागरूक करने के लिए उर्वरकों के संतुलित उपयोग विषय पर ऑनलाइन वेबिनार का आयोजन किया गया। Zoom App के जरिये हुई इस ऑनलाइन मीटिंग में किसान भाइयों को उर्वरकों के सही इस्तेमाल और केमिकल उर्वरक से होने वाले नुकसान आदि जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर जानकारी दी गयी।


किसान जागरूता केन्द्र के वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान डॉ नित्यानंद ने बताया कि आज के समय में किसान भाई अपनी खेतों में असन्तुलित मात्रा में उर्वरकों का प्रयोग कर रहे हैं साथ ही साथ अधिक वे सिर्फ एक या दो ही तरह के उर्वरकों का प्रयोग रहे हैं जिसके दुष्प्रभाव से फसल उत्पादन के साथ साथ उनकी खेतों में मृदा का स्वास्थ्य भी खराब हो रहा है। उन्होंने किसान बंधुओ से अपील कि की वे अपने खेत की मिट्टी की जाँच अवश्य करवाएं जिससे यह पता चल सके कि उनके खेतों में किस पोषक तत्व की कमी है और उस खेत मे मृदा जाँच के अनुसार ही संतुलित मात्रा में पोषक तत्व का प्रयोग किसान भाई अपने खेतों में करें।

कार्यक्रम में कृषि मौसम वैज्ञानिक डॉ अनूप कुमार चौबे ने केमिकल उर्वरक के असंतुलित प्रयोग से होने वाले हानि के बारे में विस्तृत जानकारी दी तथा सन्तुलित उर्वरक के प्रयोग से होने वाले लाभों के बारे में विस्तृत जानकारी किसानों को दिए।

डॉ चौबे ने कहा कि अभी खरीफ सीजन चल रहा है और इस समय की मुख्य फसल धान है। इस धान की फसल में संतुलित उर्वरक की मात्रा, उर्वरक डालने का समय, उर्वरक का सही जगह और सही विधि क्या है, इसकी विस्तृत जानकारी भी डॉ. चौबे के द्वारा दिया गया।

कैसे करें उर्वरकों का संतुलित इस्तेमाल?

उन्होंने बताया कि धान के संकर एवं अधिक उत्पादन देने वाले प्रजाति के लिए रोपाई के समय DAP 130 किलोग्राम, यूरिया 80 किलोग्राम तथा पोटाश 67 किलोग्राम या NPK 12:32:16 देना है तो 188 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से खेत तैयारी के समय पट्टा लगाते समय करें।

66 किलोग्राम यूरिया कल्ले निकलते समय एवं 66 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर गाभा में बाली बनते समय प्रयोग करें। वही ऊपरी जमीन पर अगात प्रजाति एवं सुगंधित बौनी प्रजातियों के लिए रोपाई के समय DAP 88 किलोग्राम, यूरिया 53 किलोग्राम तथा पोटाश 33 किलोग्राम या NPK 12:32:16 देना है तो 125 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से खेत तैयारी के समय पट्टा लगाते समय खेत मे डाले।

44 किलोग्राम यूरिया कल्ले निकलते समय एवं 44 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर गाभा में बाली बनते समय प्रयोग करें। जिंक सल्फेट 20 से 25 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से खेत के अन्तिम जुताई के समय या कदवा के पूर्व खेत मे मिलाएं।

उर्वरकों के संतुलित प्रयोग से होगा फायदा ही फायदा

  • उचित समय पर सही मात्रा में उर्वरकों के प्रयोग से पेड-पौधों की वृद्धि होती है।
  • संतुलित उर्वरक प्रबंधन फसलों की पैदावार बढ़ोतरी के सभी कारकों को प्रभावित करती है।
  • उच्च गुणवत्ता की फसल की उपज होती है।
  • पोषक तत्वों की कमी पूरी होती है।
  • संतुलित उर्वरक प्रबंधन पौधों में रोग प्रतिरोधक क्षमता को विकसित करता है।
  • पौधों की जड़ों की विकास मे सहायता प्रदान करते है। फूल और फलो की संख्या मे बढ़ोतरी करते हैं।

जैविक एवं कार्बनिक खाद के इस्तेमाल से होगी मिट्टी की उर्वरा शक्ति में वृद्धि

केन्द्र के शस्य वैज्ञानिक श्री पंकज कुमार सिन्हा ने किसानों को हरी खाद, जैविक खाद जैसे दलहन फसल के लिए राइजोबियम 400 से 600 ग्राम और पीएसबी 1 से 2 किलोग्राम तथा धान, गेंहु, मक्का, ज्वार, बाजरा के लिए एजोटोबैक्टर 1 से 2 किलोग्राम और पीएसबी 2 से 3 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर उपचारित बीज के प्रयोग करने एवं इनसे होने वाले लाभों के बारे में विस्तृत जानकारी दी।

उन्होंने ये भी कहा कि अपने खेतों में हरी खाद, जैविक खाद, कार्बनिक खाद का प्रयोग करके किसान बन्धु फसल उत्पादन क्षमता को बढ़ा सकते है और साथ ही साथ अपने खेत की मिट्टी की उर्वराशक्ति में वृद्धि तथा मृदा के स्वास्थ्य को भी बनाये रख सकते हैं।

Source: Aurangabad Now

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