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नवरात्रि 2021: जानिए मां शैलपुत्री की पूजा का विशेष महत्व, पढ़िए इनकी कथा और विशेष मंत्र

Aurangabad Now Desk

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औरंगाबाद, Oct 07, 2021 (अपडेटेड Oct 07, 2021 5:20 PM बजे)

शारदीय नवरात्र का आरंभ आज गुरुवार 7 अक्टूबर से शुरू गया है। नवरात्र का पहला दिन मां शैलपुत्री का होता है, जो सौभाग्य की भी प्रतीक हैं। वह नौ दुर्गाओं में पहली दुर्गा हैं। उन्हें यह नाम राज हिमालय पर्वत में यहीं पैदा होने के कारण मिला है। इनका वाहन वृषभ है।

नवरात्र के पहले दिन योगी अपनी शक्ति को जड़ में रखकर योग का अभ्यास करते हैं। 

कैसे करें माँ शैलपुत्री की पूजा

  • सबसे पहले माता शैलपुत्री की प्रतिमा या चित्र को चौकी पर रखकर गंगाजल से शुद्ध कर लें।
  • कलश में जल भरकर उस पर नारियल रखें और कलश को खम्भे पर स्थापित करें।
  • श्री गणेश, वरुण, नवग्रह, षोडश मातृका, सात सिंदूर की बिंदी पोस्ट पर ही लगाएं।
  • इसके बाद व्रत का संकल्प लें, मां शैलपुत्री समेत सभी स्थापित देवी देवताओं की वैदिक और सप्तशती मंत्रों से पूजा करें. इसमें आह्वान, आसन, अर्घ्य, आचमन, स्नान, वस्त्र, सौभाग्य सूत्र, चंदन, रोली, हल्दी, सिंदूर, दूर्वा, बिल्वपत्र, आभूषण, पुष्प-हार, सुगंधित पदार्थ, धूप-दीप, नैवेद्य, फल, पान, दक्षिणा, आरती दो प्रदक्षिणा, मंत्र पुष्पांजलि आदि।
  • अंत में प्रसाद बांटकर पूजा पूरी करें।

माँ शैलपुत्री की कथा और महत्व

शैलपुत्री के दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल का फूल है। शैलपुत्री की पूजा करने से जीवन में स्थिरता आती है। हिमालय की पुत्री होने के कारण यह देवी प्रकृति रूप भी हैं। महिलाओं के लिए इनकी पूजा करना सबसे अच्छा और शुभ होता है। नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा की सबसे पहले शैलपुत्री के रूप में पूजा की जाती है।

एक बार जब प्रजापति दक्ष ने एक विशाल यज्ञ किया, तो उन्होंने सभी देवताओं को इसमें आमंत्रित किया, लेकिन भगवान शिव को नहीं बुलाया गया और जब देवी सती बिन बुलाए पिता के घर पहुंचीं तो उन्होंने भगवान शिव के प्रति अच्छे-बुरे शब्दों का प्रयोग किया। सती अपमान सहन नहीं कर सकीं। उन्होंने यज्ञ की अग्नि में स्वयं को जलाकर भस्म कर दिया।

इस दुःख से व्याकुल होकर भगवान शिव ने यज्ञ का नाश कर दिया। इस सती ने अगले जन्म में शैलराज हिमालय की पुत्री के रूप में जन्म लिया और उन्हें शैलपुत्री कहा गया। शैलपुत्री भगवान शिव की पत्नी हैं।

नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है, उनका व्रत रखा जाता है। जिससे मां की कृपा हमेशा भक्तों पर बनी रहती है।

Navratri Day 1 Maa Shailputri: मंत्र (Mantra)

वंदे वंचितलाभाई चंद्रधरधाकृतशेखरम।

वृषरुधन शूलधरन शैलपुत्रिन यशस्विनीम।

Source: Aurangabad Now

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