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औरंगाबाद: पिछले दिनों हुई बारिश की वजह से हवा की सेहत में सुधार, Air Quality Index खतरनाक स्तर से नीचे

ठंड के दिनों में तापमान कम होने की वजह पॉल्यूटेन्ट हवा में ऊपर जा नहीं पाते जिससे Air Pollution की समस्या बढ़ जाती है। पिछले दिनों हुई बारिश के बाद से औरंगाबाद के AQI में सुधार देखने को मिला है। पढिये पूरी ख़बर

Aurangabad Now Desk

Aurangabad Now Desk

औरंगाबाद, Jan 01, 2022 (अपडेटेड Jan 01, 2022 2:21 AM बजे)

जिले में पिछले दिनों हुई बारिश के बाद और कुछ फ़ायदा हुआ हो या ना हुआ हो लेकिन हवा की सेहत में तो सुधार हो गया है। 27 दिसंबर से पहले जहाँ जिले का Air Quality Index (AQI) अपने ख़तरनाक स्तर पर था वहीं बारिश होने के बाद ये Satisfactory लेवल पर आ गया। बारिश की वजह से हवा में मौजूद धूलकण पानी की बूंदों के साथ नीचे बैठ जाते हैं जिससे हवा की गुणवत्ता में सुधार हो जाता है।

गुरुवार को औरंगाबाद की हवा के एयर क्वालिटी इंडेक्स को पीला सिग्नल मिला था। एयर क्वालिटी इंडेक्स वैल्यू 50 तक होने पर इसे अच्छा माना जाता है। इस स्तर तक हवा में धूलकण, कार्बन डाई ऑक्साइड, कार्बन मोनो ऑक्साइड, सल्फर डाईऑक्साइड जैसे प्रदूषक तत्वों की मात्रा काफी कम होती है।

जैसे-जैसे हवा में इन तत्वों की मात्रा बढ़ती जाती है, वैसे-वैसे हवा की गुणवत्ता खराब होती जाती है। हरे रंग तक इसे स्वास्थ्य के लिए बेहतर माना जाता है। इसके बाद प्रदूषण की मात्रा बढ़ने के साथ ही एयर क्वालिटी इंडेक्स वैल्यू बदलता जाता है। दिवाली के बाद से ही औरंगाबाद की एयर क्वालिटी इंडेक्स वैल्यू रेड जोन में जा पहुंची थी। वहीं, यह अब बेहतर होकर 74 हो गई है। हालांकि आज फिर से हवा की क्वालिटी गिरकर 127 तक चली गयी है जो स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं है।

क्या होता है Air Quality Index (AQI)?

Air Quality Index (AQI) या वायु गुणवत्ता सूचकांक, यह दरअसल एक नंबर होता है जिसके जरिए हवा की गुणवत्ता पता लगाया जाता है। 

हर देश का Air Quality Index वहां मिलने वाले प्रदूषण कारकों के आधार पर अलग अलग होता है। भारत में AQI को पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने लॉन्च किया था। इसे एक संख्या, एक रंग, एक विवरण के आधार पर लॉन्च किया गया था। दरअसल देश में अभी बहुत बड़ी आबादी है जो शिक्षित नहीं है, इस लिए उन्हें प्रदूषण की गंभीरता को समझाने के लिए इसमें रंगों को भी शामिल किया गया है।

AQI को इसकी रीडिंग के आधार पर छह कैटेगरी में बांटा गया है-

  • 0 और 50 के बीच एक्यूआई को अच्छा,
  • 51 और 100 के बीच संतोषजनक,
  • 101 और 200 के बीच मध्यम,
  • 201 और 300 के बीच खराब,
  • 301 और 400 के बीच बेहद खराब और
  • 401 से 500 के बीच गंभीर श्रेणी में माना जाता है।

भारत में एक्यूआई आठ प्रदूषण कारकों (PM10, PM 2.5, NO2, SO2, CO2, O3, NH3 और Pb) के आधार पर तय होती है। पिछले 24 घंटे में इन कारकों मात्रा के आधार पर हवा की गुणवत्ता को बताता है। इसके लिए किसी भी शहर के अलग अलग जगहों पर इसका मॉनिटर मशीन लगाया जाता है। इसकी रीडिंग के आधार पर लोगों को स्वास्थ्य संबंधी दिशा निर्देश भी जारी किए जाते हैं।

औरंगाबाद की हवा लगातार प्रदूषित क्यूं होती जा रही है?

पिछले कुछ वर्षों से तुलना करें तो औरंगाबाद की हवा ज्यादा जहरीली हुई है। इसके पीछे कईं कारण हो सकते हैं जो रिसर्च का विषय है। लेकिन कुछ आम कारणों की बात करें तो वो ये हो सकते हैं-

  • जिले में शहरीकरण बढ़ा है जिसकी वजह से गाड़ियों की संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है।
  • शहर में स्थापित सीमेंट फैक्ट्री, राइसमिल, थर्मल पावर प्लांट आदि जैसे उद्योग धंधों की वजह से पार्टिकुलेट मैटर (PM 2.5 और PM 10) का उत्सर्जन बढ़ा है।
  • ठंड के दिनों में इन्वर्जन की परिघटना से स्मॉग पॉल्युशन बढ़ता है।
  • जिले में खरीफ़ के फसलों की कटाई में आधुनिक मशीनों के इस्तेमाल कर कारण पराली जलाने की संख्या में वृद्धि हुई है। आदि

पोल

क्या औरंगाबाद में सीमेंट फैक्ट्री की वजह से हवा प्रदूषित हुई है?

हाँ! सीमेंट फैक्टरी की वजह से ही वायु प्रदूषण बढ़ा है।
33%
जिले में वायु प्रदूषण बढ़ने के और भी अन्य कारण हैं।
67%
नहीं! सीमेंट फैक्ट्री का जिले में वायु प्रदूषण से कोई लेना देना नहीं है।
0%

यह पोल समाप्त हो गया है।

Source: Aurangabad Now

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